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मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

दो चार दिन

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जिंदगी है दो चार दिन की 
चल खुल के सांस ले ले .
दोस्तों से भर ले दुनिया 
दुश्मनों  को दोस्त कर ले .
तू भी अच्छा मैं भी अच्छा 
फिर हृदय  है कौन मैला !
मैल ,धूल धरती पर सजती 
देख हृदय में जगह न ले ले . 
नफ़रतों  की भीड़ में से 
चन्द रहमतों को साथ ले ले .
जिंदगी है दो चार दिन की 
चल खुल के सांस ले ले .

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

औरत


औरत ! तू है क्या
 बेचारी ,अभागी, सुकुमारी ?

जब  दुनिया में,
शक्ति रूप प्रतिष्ठित,
'जगदम्बा' नारी रूप में ,
तू कहलाती अबला नारी !

कवियों द्वारा दिया
 नाम 'चंद्रमुखी' ,
सुनते ही तू शर्मा गई .
छुइ मुई बन, डोले में बैठ,
बादलों के रथ पर सवार,
 तू घर आ गई .

अच्छा है, पद माता
का है तुझे निभाना.
भार्या बन, पति का 
आदेश निभाना.

पर  भूल न जाना वह रूप,
 जो लक्ष्मीबाई ने दिखाया मैदानों में,
गार्गी ने दिखाया दरबारों में .

माता ,पत्नी ,बहू , बेटी का धर्म
निभाना है, तुझे इस धरती पर.

पर भूल न जाना -
तू बनी है किस मिट्टी  से !
अपने अस्तित्व  की माटी का
कर्ज अदा करना है अभी .

अपनी पहचान को कभी 
अपने से जुदा  मत होने देना.

तुम्हारी पहचान छीनने वालों पर,
प्रहार करने से न चूकना .
सम्मान करने वालों को
प्रणाम करना भी मत भूलना .  

शनिवार, 28 नवंबर 2015

जिंदगी

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जिंदगी नहीं है फूलों की सेज,
जिसे बिछा  कर इंसान सो सके


जिंदगी नहीं है मखमली कालीन ,
जिसके गुजगुजेपन पर बेफिक्र हो सके 


जिंदगी नहीं है पंखे की हवा ,
जहाँ  स्वेद कणों  को धो सके 


जिंदगी नहीं है चाय का धुआँ,
जो आरामकुर्सी पर बैठ  ले सकें

जिंदगी नहीं है कार की पिछली सीट 
जहाँ मनचाही नींद का आनंद उठा सकें 


जिंदगी  कदापि नहीं कोने का कमरा ,
जहाँ  सदैव सुरक्षा की साँस ले सकें 





जिंदगी का हर एक पल है संघर्ष ,
जिसे ओढ़ कर शायद यह सफल हो सके 


जिंदगी के हर एक पल में है नया दुःख ,
 इस सागर में तैरकर  सुख के मोती निकल सके 



जिंदगी का हर एक पल है हिम्मत ,
माला को फेर ही विजय पताका फहर सके
                                                 
                                                         पल्लवी गोयल



शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

क्यों ?

Beautiful Night Sky Wallapers (20)




बात आती है  जुबाँ पर
पर  लफ्ज़  नहीं  होते 


चित्र  बसा है  नज़रों में
पर  नज़र  नहीं  उठती


धड़कने  बजती हैं  ज़ोर से
पर  गुुम होती है  कहीं  एक

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

सच्चा दोस्त

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आपके दर्द  की  एक मुस्कान पर 
जो एक  शख्स   आता 
है  आपके  करीब। 
आपके  घावों पर  मलहम  लगा, 
चेहरे पर मुस्कान  भी  सजाता  है। 
वह  न केवल  अच्छा  इंसान  होता है, 
वह  आपका  अपना भी  होता है। 
जो नहीं  देखता,  
दिन  बुरा  है  या  अच्छा,
हाल  अच्छा है कि  खस्ता 
वह  देखता है 
चेहरे की  एक  रेखा 
और  सभी  मुश्किलें , 
खुशियों  में बदल  देता है 
वह आपका सच्चा  दोस्त  होता  है
                                  

गुरुवार, 12 नवंबर 2015

तेरी मुस्कान

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हर पल
तेरे चेहरे
की शक्ल में
तेरी मूरत आती है,
गोता  लगाती है,
खिलखिलाती है,

खाला जी का घर समझ
यहीं पर बस जाती है

क्या तुझे और
नहीं कोई काम ?

क्षण  भर को न लेती
मुस्कराने से विश्राम

जा ! खाली  कर दे
इस रास्ते  को
गुजरना  है अभी
औरों  को भी
इस दर से


बहुत ही निर्लज्जा  बनी मैं
कठोरहृदया , दिया तुझे वज्राघात

परन्तु इन चार पंक्तियों के
इस विचार को
क्यों न कर पाई  आत्मसात ?

जो प्रहार किया था तुझपर
पूरे वेग से आ पड़ा
मुझ ही पर

तेरे चेहरे पर तिरती
यह मुस्कान
क्यों नहीं उतरती
मेरे मुख पर  

बुधवार, 2 सितंबर 2015

प्राणों का स्वर



चंदन की  खुशबू  में  लिपटा 
प्राणों का  वह  स्वर  बोला 


सुनी  तुमने  वह  आवाज़  
जो कहीं  हौले से  पत्ता  डोला 


क्या है  यह,  उनके  आने की  आहट 
कानों में  जो  बजती  तान


धरती के  कंपन  का हुआ  शुरू 
मधुर  मधुर  सुरीला गान 


मारुत  की स्निग्ध  बयार 
बासी हो  जब तन  छूने  आती 


पलकें  मिलन  के   स्वप्निल  आनंद  में 
भीग भीग  मुझ  तक  आतीं।