गीदड़ों के झुंड ने कब्जा किया है मकानों पर,
बन बैठे हैं राजा, मानो हैं आसमानों पर।
बोलते हैं यूँ कि मानो वह हैं प्यारे मेमने से,
दुनिया है जालिम और वे हैं बिल्कुल छौने से।
बातें करते हैं यूँ जो मानो वही हरदम सही,
इसी धोखे में रखकर सबको वे जमाते अपनी दही।
यह बैठते राजा के पीछे, उन्हीं से उनका मान सजता,
वहीं से उनकी तूती बोलती, वहीं से उनका गाला बजता।
झूठ की चादर, झूठ के आवरणों में सजता इनका दरबार,
सत्य का अस्तित्व ही होता यहां नकार,
न्याय की दुहाई की न यहां कोई टंकार,
घंटे पर लगे हैं इनके पहरे, इनकी सरकार है,
गिद्धों को रखा है इन्होंने नौकरी पर,
मजाल किसी की जो मंडराए उनके द्वारों पर।
पंजाबी गोयल
चित्र साभार गूगल

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