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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

सफ़र

 जीवन के इस सुनसान डगर में,

मिली हूँ मैं एकाकीपन से,

कभी मिली कुछ खुशियों से,

कभी मिली उस शांति से।

​यह सफ़र सुहाना प्यारा है,

यहाँ न कोई बेगाना है,

कोई नहीं इस डगर में कहीं भी,

फिर भी रास्ता पहचाना है।

​मंजिल भी केवल तुम हो,

साथी भी केवल तुम ही,

सहारा भी केवल तुम हो,

 मुश्किलें भी केवल तुम ही।

​जब पहुँचूँगी तुम तक,

तो मिल जाऊँगी तुम में ही,

राही शांति ,सुकून से मिल,

फिर तुम में ही मिल जाऊँगी।

​ओ मेरे जीवन के स्वामी,

थोड़ा और पास आ जाना तुम,

जो जरा बढ़ूँ मैं आगे को,

दो कदम आगे बढ़ाना तुम भी।

​मिलन जो होगा तुमसे स्वामी,

 न जरूरत होगी किसी और की,

हम तुम दोनों साथ मिलेंगे,

दूरी तय होगी एक और सफ़र की।

पल्लवी गोयल

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